पी तो नहीं है,मैंने शराब यारो
फिर भी छाया,कुछ नशा सा है.
आदत तो नहीं है,इस नशे की हमें यारो.
फिर ना जाने,आ रहा कुछ मजा सा है.
टकराई तो थी, तेरी नजरो से मेरी आँखे
और लगा भी था,यह अंदाज तो कातिलाना है.
मगर क़त्ल होकर भी,धड़क रहा है यह दिल
क़त्ल करने का ये अंदाज,शायद कुछ नया सा है.
क़त्ल करने का ये अंदाज,शायद कुछ नया सा है.............

No comments:
Post a Comment